
समाचार वाचक, रायपुर। सर्वोच्च न्यायालय ने न्यायाधीश संतोष शर्मा, सुषमा सावंत और सुधीर कुमार को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के जज के तौर पर नियुक्त किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। कॉलेजियम की 18 अगस्त को हुई बैठक में इन तीन नए जजों की नियुक्ति की सिफारिश को मंजूरी दी गई।
कौन हैं ये तीन जज ?
संतोष शर्मा – वर्तमान में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कोरबा के रूप में दर्ज किया गया है। उन्होंने 19 मार्च 2009 को न्यायिक सेवा में प्रवेश किया था। अपने कार्यकाल में वे दंतेवाड़ा और बलौदाबाजार में जिला एवं सत्र न्यायाधीश, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में रजिस्ट्रार (एसएंडए) तथा रजिस्ट्रार (विजिलेंस), फैमिली कोर्ट के जज और रायपुर में जिला एवं सत्र न्यायाधीश जैसे पदों पर कार्य कर चुके हैं। उनकी शैक्षणिक योग्यता में बीएससी, प्राणीशास्त्र में एमएससी, एलएलबी और समाजशास्त्र में एमए शामिल हैं।
सुषमा सावंत – वर्तमान में छत्तीसगढ़ शासन के विधि एवं विधायी कार्य विभाग में प्रधान सचिव के पद पर कार्यरत हैं। हाईकोर्ट की वरिष्ठता सूची में भी उनका नाम इसी पद के साथ दर्ज है। उन्होंने 15 अप्रैल 1994 को न्यायिक सेवा में प्रवेश किया था। अपने लंबे न्यायिक करियर में उन्होंने जिला एवं सत्र न्यायाधीश, फैमिली कोर्ट की प्रधान न्यायाधीश, छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी की निदेशक और प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, राजनांदगांव सहित विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारी संभाली है।
सुधीर कुमार वर्तमान – रायपुर फैमिली कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश हैं। उन्होंने 13 मार्च 2009 को न्यायिक सेवा में प्रवेश किया था। वे दंतेवाड़ा, धमतरी और बिलासपुर में जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में कार्य कर चुके हैं। इसके अलावा छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में रजिस्ट्रार (विजिलेंस) और रजिस्ट्रार जनरल, दुर्ग के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग में विधिक सलाहकार के पद पर भी सेवाएं दे चुके हैं। उनकी शैक्षणिक योग्यता बीए और एलएलबी है।
तीनों अधिकारियों का न्यायिक सेवा में लंबा अनुभव रहा है। हाईकोर्ट की उपलब्ध वरिष्ठता संबंधी आधिकारिक जानकारी में संतोष शर्मा, सुषमा सावंत और सुधीर कुमार क्रमशः वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों की सूची में महत्वपूर्ण स्थान पर दर्ज हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि तीनों को जिला न्यायपालिका के साथ-साथ न्यायिक प्रशासन का भी व्यापक अनुभव प्राप्त है।
कॉलेजियम की मंजूरी हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण है, लेकिन इसे अंतिम नियुक्ति अधिसूचना नहीं माना जाता। संविधान के अनुच्छेद 217 के तहत हाईकोर्ट के न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने और नियुक्ति की अधिसूचना जारी होने के बाद ही संबंधित अधिकारी हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पदभार ग्रहण कर सकते हैं। अनुच्छेद 217 में हाईकोर्ट के न्यायाधीश के लिए कम से कम दस वर्ष की न्यायिक सेवा या निर्धारित अवधि की वकालत का अनुभव भी योग्यता के रूप में रखा गया है।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के लिए यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि तीनों प्रस्तावित न्यायाधीश राज्य की न्यायिक सेवा से आते हैं और उन्हें जिला अदालतों में मुकदमों की सुनवाई तथा न्यायिक प्रशासन का व्यापक व्यावहारिक अनुभव है। नियुक्ति की शेष संवैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन तीनों के हाईकोर्ट में आने से न्यायिक पीठ को अनुभवी न्यायिक अधिकारियों का लाभ मिलने की उम्मीद है।


