समाचार वाचक। आज राष्ट्रीय पुलिस स्मृति दिवस है। वर्ष 1959 में आज ही के दिन, भारत-चीन सीमा पर गश्त के दौरान भारी हथियारों से लैस चीन के सैनिकों के, घात लगाकर किए गए हमले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल- सी.आर.पी.एफ. के दस जवान शहीद हो गए थे। शहीद जवानों की स्मृति में हर वर्ष 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता है। अपने सोशल मीडिया पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर ड्यूटी के दौरान अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने कहा कि पुलिसकर्मियों का साहस, अटूट समर्पण और सर्वोच्च बलिदान देश की स्मृतियों में हमेशा अंकित रहेगा। सोशल मीडिया पोस्ट में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि पुलिस कर्मियों ने मातृभूमि के सम्मान की रक्षा और नागरिकों की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देकर देशभक्ति की सर्वोच्च मिसाल पेश की है।
वहीं, गृहमंत्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। अपने संबोधन में उन्होंने पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के बलिदान, देश की आंतरिक सुरक्षा में उनके योगदान और नक्सलवाद के खिलाफ मिली सफलता का उल्लेख किया। उन्होंने 31 दिसंबर 2029 तक देश को नशे की समस्या से मुक्त करने के लक्ष्य के साथ पुलिस बलों से एकजुट होकर काम करने का आह्वान भी किया।
इधर के माना स्थित चौथी वाहिनी छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल के प्रांगण में आयोजित पुलिस स्मृति दिवस परेड कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय शामिल हुए।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दिन हमे वीर सपूतों की याद दिलाता है, उन्होंने कहा कि दशकों तक नक्सलवाद की हिंसा और भय से प्रभावित रहे प्रदेश ने शांति, सुरक्षा और विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि प्राप्त की है. हमारे जवानों के साहस, पराक्रम और सर्वोच्च बलिदान से निर्णायक सफलता मिली है.


